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साइबर कैफे में लड़की की चूत की चुदाई cyber cafe me ladaki ki chudai


साइबर कैफे में लड़की की चूत की चुदाई cyber cafe me ladaki ki chudai


हेलो मेरे प्यारे पाठको, आप लोगो का देशी कहानी डॉट एक्सवाईजेड में स्वागत है। मैं रोज ही इसकी चुदाई कहानी रात को सोते समय पढ़ती हूँ और आनन्द लेती हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और रसीली कहानी पढने को बोलूंगी। आज पहलीबार आप लोगो को अपनी खुद की कामुक चुदाई की कहानी सुना रही हूँ। कई दिन से मैं लिखने की सोच रही थी।अगर मेरे से कोई गलती हो तो क्षमा कर दीजियेगा।
मेरा नाम स्वेच्छा चदुर्वेदी है। मेरी उम्र इक्कीस साल है,मेरा रंग गोरा है। गोरे बदन पर सारे लड़के फ़िदा है। बुड्ढों के भी लंड में मुझे देखकर जान आ जाती है। वो भी अपना खड़ा कर लेते है। जवान मर्दो की तो बात ही न करो वो तो लंड को बम्बू बना लेते है। अपने पैजामे को तंबू बना लेते हैं। आशिको की लाइनों को देखकर मेरा घर से बाहर जाने का मन ही नहीं करता था। जिसको देखो वही मेरे इस 33, 28, 36 के फिगर पर फ़िदा था। भरी जवानी का रस हर कोई  निचोड़ना चाहता था। लेकिन मै भी कोई रंडी तो थी नही जो हर किसी के हाथों  बिक जाऊं। लेकिन कुछ मजबूरी के कारण मुझे अपनी चूत का बलिदान देना पड़ा। दोस्तों अब मै अपनी कहानीं पर आती हूँ। एक साल पहले मेरे पिता “दीनानाथ चदुर्वेदी” की मृत्यु हो गई थी। घर का सारा काम मुझे ही देखना पड़ रहा था।

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जहां भी मै जाती थी। लोग अपनी नजर मुझपे ही गड़ाए रहते थे। मै तो कभी कभी परेशान हो जाती थी। कुछ ही दिनों में मैंने भी अपनी आदत बदली। मैंने भी सबको लाइन देना शुरू क़िया। हर किसी की नजर में बस हवस ही नजर आने लगी। सभी मुझे चोदना चाहते थे। मुझे राशन कार्ड बनवाना था। क्योंकि सब जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही थी। एक भाई था मेरा वो भी छोटा था। मैं एक साइबर कैफे पर गई। मैने उससे अपना राशन कार्ड बनाने को कहा। लेकिन वो तो मुझे घूरे जा रहा था। कुछ देर बाद उसने कहा- कल बना दूंगा
मेरे गाँव में केवल एक ही साइबर कैफे था। साइबरकैफ़े गाँव से बाहर बहुत दूर था जहाँ तक पैदल जाने में 15 मिनट लगते थे. उस पर जो लड़का रहता था उसका नाम देवेश  था। वो बहुत ही जबरदस्त पर्सनालिटी का लगता था। बड़ा भाव खा रहा था। दूसरे दिन भी मैं गई। लेकिन वो कुछ चाह रहा था मुझसे। उसकी नजर बता रही थी की वो मुझे चोदना चाहता है। मैंने भी अब अपने लटके झटके दिखाकर उससे काम कराना चाहा। मैंने अपना दुपट्टा गले से हटा लिया। मेरे गहरे कटिंग की टाइट कमीज़ में चूंचिया दिखने लगी। वो अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर मेरे जाल में फंसता जा रहा था। उसने मुझे कहा- बहुत गजब की लगती हो तुम
मैं- क्यों ऐसा क्या देख लिया??? इतने दिनों से आती हूँ तुम्हारे यहां। आज ही तुम्हे मै गजब की लगी
देवेश - पहले भी लगतीं थी लेकिन आज कुछ ज्यादा ही लग रही हो
मैंने पूछा- राशन कार्ड बनने में कितने दिन लगेंगे
देवेश बोला - जब तक मेरा काम पूरा नही हो जाता तब तक
मै बोली - तुम्हारा क्या काम है? ऐसा
देवेश  उस दिन साइबरकैफ़े में अकेला ही था। उसने मेरा हाथ पकड़ा। और मुझे कस कर दबाते हुए एक कोने में लेजाकर कहने लगा- बस एक बार मै तुम्हारी चूत को देखकर चोदना चाहता हूँ। तुम्हारे इस बूब्स को दबाकर पीना चाहता हूँ। बदले में मै तुम्हारे घर  राशन कार्ड बनवाकर पहुचा दूंगातुम्हे बार-बार मेरे यहां आने की जरूरत नहीं।

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मै भी सोच में पड गयी। एक चूत के बदले न पैसा देना होगा न ही बार-बार दौड़ना पडेगा। लेकिन मुझे डायरेक्ट बात भी नहीं करनी थी।मैने झूठ मूठ का घबराने का बहाना बनाया।
मै बोली - अरे ..ये तुम कैसी बातें कर रहे हो?? तुम्हे बात करनी भी नहीं आती है क्या अपने ग्राहकों से कैसे बात करते हैं
देवेश बोला - “देखो स्वेच्छा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। तुम्हारी रस भरी जवानी ही ऐसी है कि मैं अपने आपको काबू नहीं कर पा रहा हूँ मेरा मन तुमको चोदने को कर रहा था तो मैंने कह दिया
मै बोली- ये बात घर वालो को पता चल गई तो क्या होगा मालूम है तुम्हे????
देवेश बोला- अपने घरवालो थोड़ी बता के तुम्हे चुदवाना है..
मै कहा-  चलो ठीक है लेकिन बहुत आराम से चोदना। मुझे ज्यादा दर्द नहीं होना चाहिए।
देवेश  को सकारात्मक संकेत मिलते ही कमल के फूल जैसे खिल गया। फिर मुझसे से कहने लगा।
देवेश - “मेरी जान में तो तुम्हे बहुत आराम से चोदूंगा। थोड़ा सा भी दर्द नहीं होगा। बस तुम मेरा साथ देना। आज मैं तुम्हे जन्नत का सैर कराऊंगा
 कंप्यूटर पर टिकटिक.. टिकटिक टिक की कीबोर्ड से टाइपिंग कीआवाज कर रहा था। टाइपिंग को बंद करते हुए उसने मेरी और देखा।  मैंने अपना राशन कार्ड का फॉर्म उसके सामने रख दिया। उसने मेरे फॉर्म को दूसरी तरफ रख दिया। उसके पैर के ऊपर कई सारे पन्ने रखे हुए थे। उन सबको हटा दिया। उसका लंड पैंट में तना हुआ दिखाई दे रहा था। उसने एक पल की भी देरी न करते हुए मुझे खीच कर अपने लंड पर बिठा लिया। वो मेरा फॉर्म भरते  हुए ही मुझे चुम्बन करता रहा। उसका लंड तेजी से खड़ा हो रहा था।
मेरी गांड में उसका लंड चुभ रहा था।
 देवेश  ने चूमने से शुरुवात कर दी थी। मै भी मूड बना चुकी थी। मेरा काम आज लगने वाला था। और मेरी चूत का उद्घाटन भी होने वाला था
उसका दरवाजा काले शीशे का था जिसमे से सब कुछ बाहर दिख रहा था। तभी दुकान पर एक अधेड़ उम्र के अंकल जी आ गए। मै झट से उसके ऊपर से हटकर कुर्सी पर बैठ गयी। मेरा दिल धक् धक् धक् धक् धक् धक् करके धडकने लगा । थोड़ी देर बाद अंकल जी चले गए। लेकिन डर के मारे दुबारा कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। दूसरे दिन रविवार था। हम लोग दुसरे दिन चुदाई का वादा करके चली आयी। उस दिन वो अपनी दुकान बंद रखता था। वो अगले दिन दुकान को खोलकर सिर्फ मेरी चुदाई ही करना चाहता था।  मुझे याद आया तो


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मैंने कहा- कल तो सन्डे है। आपकी तो दुकान बंद रहेगी
देवेश ने कहा - “जिसको चोदने को इतनी खूबसूरत लौंडिया मिल रही है, उसके लिए एक तो क्या मैं हर सन्डे को अपनी दुकान खोल सकता हूँमेरी जान कल दोपहर 12 बजे तक मैं तुमको चोदने के लिए आ जाऊँगा।
मैने कहा- ठीक है मैं भी आ जाऊंगी
इतना कहकर मै अपने घर चली आयी। मै चुदने की ख़ुशी में पागल हो रही थी। मै मन ही मन सोचने लगी बाप रे कल इतनी कड़ाके की गर्मी में ये दोपहर में चोदेगा मै तो मर ही जाऊंगी। फिर भी दूसरे दिन मै उसके दुकान के सामने जा पहुची। वो बाहर ही खड़ा मेरा इंतजार कर रहा था। उस दिन देवेश  बड़ा स्मार्ट लग रहा था। मै तो समय से पहुच गई थी। लेकिन वो तो मुझसे पहले ही इतने धूप मे चुका था। तेज की धूप में कोई घर के बाहर नहीं दिख रहा था। सारे लोग अपने अपने घरों में थे। मै जल्दी से उसके दुकान में घुसी। उसने अंदर से दरवाजा बंद किया। मुझे पकड़कर कहने लगा।
डार्लिंग- आज रात भर मुठ मार कर अपने लंड का काम चलाया है। अब तो मुझे करवा दे दर्शन अपनी चूत का


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रजनीकान्त के जैसे देवेश  ने कुर्सी घुमाकर बैठ गया। मै भी उसकी गोद में जाकर बैठ गई। उसने मेरे बालो को पकड़ कर खींच लिया। मेरा सर ऊपर उठाकर। उसने मेरे होंठो पर उँगलियाँ घुमाते हुए चुम्मन करने लगा। मेरी नाजुक कोमल पंखुडियो जैसी होंठ पर अपना होंठ लगाकर चूसने लगा। मेरे होंठो में खूब ढेर सारा रस भरा हुआ था। वो चूस चूस कर पीने लगा। कभी ऊपर के होंठो को चूसता तो कभी नीचे के। मैं भी उसका साथ दे रही थी। उसके कान पर मै अपना हाथ रखे दबाये हुई थी। चुम्बन कार्य जारी रहा। उसने अपना सिस्टम ऑन किया। और नेट से ऑनलाइन ब्लू फिल्म चला दिया। हम दोनों देख देख कर गरम होने लगे। वो मुझे खड़ा होकर सहलाने लगा। एक एक अंग को छूकर उसमे बिजली दौड़ा रहा था। मै गर्म हो रही थी।
मै बोली -  ऐसा न करो कुछ कुछ होता है
देवेश - क्या होता है
मै बोली - पता नही क्यों मेरा दिल जोर जोर से धडकने लगता है। मेरी साँसे गर्म हो रही है
देवेश - मेरी अनारकली तुम गर्म हो रही हो। तुम्हे अभी चोदने में बहुत मजा आएगा
मै बोली- तो चोद डालो अब मुझे मजा आये
उसने पास में पड़े लंबे से बेंच पर लिटा दिया।
देवेश - थोड़ा तड़पाओ खुद को तो ज्यादा मजा आता है
इतना कहकर वो मेरे पैर से किस करता हुआ गले तक आ पहुचा। अपने दोनों हाथों में मेरी मुसम्मियों को भरकर दबाने लगा। मै जोर-जोर सेअं ह……अईईईआह ईअईई….अई……अ ई….इसस्स्स्स्स् उम्ह…….उहह्ह्ह् हम्म…..ओह्ह्ह्हह आह….ई... सी......” की सिसकारियां भर रही  थी। वो मेरे गले को कुत्ते की तरह चाट रहा था।


मै बोली - देवेश  तू आज गली का कुत्ता लग रहा है
देवेश बोला - तू भी अभी मेरी कुतिया बनेगी। आज ये डॉग तुझे डॉगी स्टाइल में ही चोदेगाइतना कहकर उसने मेरी कमीज को निकल कर एक तरफ फेंक दिया ।
मै उसके सामने अपने बड़े बड़े बूब्स को हिला-हिला कर खेलने लगी। लटकते हुए मुसम्मियों को देखकर उसने आकर थाम लिया।  उसने मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथों में लेकर उछाल कर खेलते हुए दबाने लगा। मेरे बूब्स फुटबाल की तरह उछल रहे थे।  मै उसके गले को पकडे हुए खड़ी थी। उसने कुर्सी पर बैठ कर मेरे बूब्स पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। मै उसके तरफ बढ़ी। उसने मेरी ब्रा का हुक खोलकर निकाल दिया। देवेश  मेरी मक्खन जैसी मुलायम चूंचियो को देखते ही अपनी जीभ लपलपाने लगा। उसने मेरे बूब्स को अपने मुह में भर लिया। गोरे गोरे मम्मो पर हलके भूरे रंग का निप्पल बहुत ही आकर्षक लग रहा था। उसने निप्पलों को पीना शुरू किया। मै खड़े खड़े मदहोश होती जा रही थी।
उसका सर पकड़ कर चूंचियो में दबा रही थी। मेरे बूब्स को जोर-जोर से पीते हुए उसने मुझे खूब गर्म किया। निप्पल को होंठो से खींच कर दांतो से काट रहा था। मेरी जान निकल रही थी। मै जोर से “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईई इ….अअअअ अ ऊओह्हह्ह ऊऊ ईई….आहा उम्ह हा हा हा” की आवाज निकाल रही थी। मैं चुदने को बेचैन होने लगी। खूब दबा दबा कर मेरे चुच्चो को टाइट कर दिया। निप्पल कडा होकर खड़ा हो गया। कुछ देर तक पीने के बाद उसने मेरे मम्मो को छोड़ दिया। धीरे धीरे अपना मुख नीचे की तरफ लाकर मेरे पेट पर चुमबन कर रहा था। देवेश  अपनी जीभ मेरी नाभि में डाल कर चाटने लगा। उसने कुछ देर तक मेरी नाभि को पीकर मुझे बहुत तड़पाया। उसने मेरी ब्लैक सलवार का नाडा खींचकर एक झटके में खोल कर निकाल दिया। सलवार के नीचे गिरते ही मैं सिर्फ पीली पैंटी में ही रह गयी। उसके सामने मुझे पैंटी में शर्म आ रही थी। मैं अपना सर नीचे करके चूत को हाथ से ढके हुए थी।
देवेश - क्या बात है मेरी जान??? गजब की माल तो तू अब दिख रही है  उसने पीछे से आकर मेरी चूत पर रखे हाथो पर अपना हाथ भी रख दिया। मेरे हाथों को हटाकर उसने अपना हाथ मेरी पैंटी में डाल दिया। चूत के दोनों पंखुडियो के बीच में अपनी उंगली से choot के गुलाबी दाने को मसल रहा था। उसने झुककर मेरी चूत के दर्शन किया। उसके बाद दाने को मसलते हुए बिना चेतावनी के उसने अपनी ऊँगली मेरी choot में घुसा दी और अपनी अंगुली घुसा घुसा कर बाहर निकाल रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद उसने मेरी चूत के छोटे छोटे भूरे-भूरे  बालो पर हाथ फेरने लगा। उसने कहा- अब और न तड़पाओ मुझे अब अपनी चूत के दर्शन अच्छे से करा दोउसने मुझे कुर्सी पर बिठा दिया। पैंटी को निकाल कर उसने मेरी टांगो को फैला दिया। मै टांग फैलाये बैठी हुई थी। कुर्सी की लकड़िया गड रही थी। मैं नीचे ही फर्श पर ही लेट गई।
देवेश  ने मेरी दोनों टांगो को फैलाकर उसने मेरी चूत के दर्शन कर रहा था। मेरी रसीली चूत को देखते ही वो उछल पड़ा। जल्दी से अपना मुह मेरी चूत पर लगाते हुए चाट रहा था। चपमचप ईस  की चाटने की आवाज आ रही थी। लग रहा था जैसे कोई कुत्ता कुछ चाट रहा हो। चूत के दाने को जीभ से रगड़ रगड़ कर होंठो से खींच रहा था। मैं बहुत ही आनंदित हो उठी। चुदने की तड़प बढ़ती ही जा रही थी। कुछ देर तक चाटने के बाद उसने अपना पैंट अंडरवियर सहित निकाल दिया। बाप रे!! उसके अंडरबियर के पीछे इतना बड़ा मोटा लंड छुपा होगा मैंने सोचा ही नहीं था।
उसका लंड तक़रीबन 9 इंच का था जितना मै सोच रही थी उससे भी ज्यादा मोटा निकला जो कल वाली ब्लूफ्लिम  में ब्लैक मैन का लंड था। सिकुड़े लंड पर जब वो बहुत लम्बा था तो खड़ा होने पर कितना बड़ा लंड होता ये सोच कर मेरी गांड फटी जा रही थी।
देवेश ने  मुझे अपना लंड हाथ में  देते हुए कहा- लो अब तुम मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चाट कर लॉलीपॉप की तरह चूसो


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मैंने उसके सिकुड़े हुए लंड को हाथो में लिया। उसका सुपाडा सच में आइसक्रीम की तरह मुलायम लग रहा था। मैने जीभ लगाकर उसे चाटना शुरू किया। वो धीरे धीरे लॉलीपॉप की डंडी की तरह टाइट होने लगा। उसका टोपा गुलाबी रंग का हो गया। मै उसे लॉलीपॉप की तरह अब चूसने लगी। उसके लंड को आगे पीछे करके उसे उत्तेजित कर दिया।  देवेश  चोदने को तड़पने लगा। उसने अपना लंड छुड़ा कर मुझे लिटा दिया। उसने मेरी टांग फैलाकर अपना  9 इंची मूसल लंड. मेरी चूत पर रगड़ने लगा। मै भी उंगलियों से अपनी चूत मसल कर गरम हो रही थी। मेरी चूत आग की तरह धधक रही थी। लंड रगड़ना मुझपे भारी पड़ने लगा।
मैने उसे चूत में लंड घुसाने को कहा। देवेश  मुझे तड़पाये  ही जा रहा था। कुछ देर बाद उसने मेरी चूत से अपना लंड सटाकर घुसाने की कोशिश करने लगा।। मेरी चूत में उसके लंड का टोपा घुस गया। मै जोर जोर से “…मररगयी रीमम्मीमम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँऊँउनहूँ उनहूँ..” की चीख निकालने लगी। उसने मेरा मुँह दबा लिया। और मेरी कमर को कसकर पकड़कर जोर का धक्का मार कर पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया। मै दर्द से तड़प रही थी। लेकिन वो धका पेल अपना लंड पेल रहा था। मै उसके गांड पर नाखून गड़ा रही थी। लेकिन उसे कुछ फर्क ही नही पड़ रहा था। वो बस चोदे ही जा रहा था। मेरे ऊपर देवेश घपा घच घपा घच कूदकर चुदाई कर रहा था। मुझे बहुत मजा आने लगा। मेरी चूत का दर्द आराम हुआ।
मैंने भी चूत उठाकर चुदाई करवानी शुरू कर दी। वो चूत में अपना लंड जड़ तक पेल कर मजा ले रहा था। वो थक गया। उसने मुझे बेंच पर लिटाकर गांड के नीचे तकिया लगा दिया। मेरी चूत ऊपर उठ गई। वो खड़ा होकर मेरी चूत को फाडने लगा। मेरी चूत में घच्च घच्च घच्च घच्च की आवाज भरी पड़ी थी। आज सारी बाहर निकल रही थी। अपनी कमर हिला हिला कर देवेश का साथ दे रही यही क्योकि आज में अपनी choot की pyas को जी भर के भुझाना चाहती थी वह  मेरी जबरदस्त चुदाई कर रहा था। आज पहली बार किसी ने मुझे ऐसे चोदा था। मुझे इस चुदाई से बड़ा आनंद मिल रहा था। मैं भी अपनी चूत उचका-उचका कर उसका नौ इंच का लंड ज्यदा से ज्यादा अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी । मेरी चूत की लगातार चुदाई से मै “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँहूँ..हममममअहह्ह्ह्हह..अईअईआई ऊ…..ह हाहा ” की आवाजो के साथ चुद रही थी। मेरी चूत का कचरा बन गया। उसने मेरी चूत से लंड निकाल लिया।
उसने अपना गीला लंड मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड के हलके भूरे छेद पर लगा दिया। मेरे चूतड़ों को पकड़ कर  धक्का मार कर अपने लंड का टोपा मेरी गांड में घुसा दिया। मै जोर सेआआआअह्हह्हह ….. ईईईईईईई….ओह्ह्ह्. अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उसने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड घुसाकर मेरी गांड फाड़ डाली। मै तड़प तड़प कर गांड चुदाई करवा रही थी। गांड पर चटा चट, चटा चट हाथ से मारते हुए अपना लंड घुसा   कर निकाल रहा था। अचानक से जोर जोर से मेरी गांड चोदने लगा। मै बहुत तेज से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँगू हूँ....हममम अहह्ह्ह्ह.....अई...अईअई….......” चिल्लाने लगी। उसने चुदाई रोक कर पूछा- “कहाँ गिराऊं अपना मालमैंने उसका लंड अपने मुह में ले लिया। उसने पूरा माल मुह में गिरा दिया। उसका गाढ़ा सफ़ेद माल पीकर मैंने चैन की सांस ली। उसके बाद मैंने अपना कागज पत्र लेकर चली आई। मै उस चुदाई को आज तक नही भूल पाई। आज भी मौक़ा मिलता ही उसके दुकान में ही चुदवालेती हूँ ।
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