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पापा के मोटे लंड से कुंवारी की चूत पूजा कराई Papa Ne Mote Land Se Choda


पापा के मोटे लंड से कुंवारी की चूत पूजा कराई Papa Ne Mote Land Se Choda


मैं रोशनी नागपुर महाराष्ट्र से आज मैं आप के सामने अपनी एक अनोखी पहली सील तोड़ चुदाई की कहानी लेकर उपस्थित हूँ / यह मेरा pahali chudai का अनुभव है, जिसमें मैंने पहली बार अपने पापा से चुदाई के मज़े लिए, वैसे मैं पिछले कुछ सालों से चुदासी कामुक कहानियाँ पढ़ती आ रही हूँ और इसलिए ही मैंने बहुत मेहनत और हिम्मत करके अपनी भी यह कहानी आप लोगों तक पहुँचाने के बारे मैं बहुत सोचा और आज उसको आप तक पहुंचा भी दिया है और मैं आशा करती हूँ कि यह मेरी आपबीती कहानी आपको जरुर पसंद आएगी/ वैसे यह घटना करीब तीन वर्ष पहले की है और मैं अपने घर पर अकेली रहती हूँ, क्योंकि मेरी मम्मी मेरे बड़े भाई के साथ पंजाब मैं रहती है, इसलिए घर पर पापा और मैं ही रहती हूँ/ पापा पूरा दिन उनके दफ्तर मैं रहते है और हर रात को वो बहुत देरी से आते है, इसलिए मैं ज्यादातर समय अपने घर पर अकेली रहती हूँ/ मेरे भाई अभिलाष की शादी करीब एक साल पहले हो चुकी है वो वहां पर अपनी वाइफ और मेरी मम्मी के साथ रहता है और मेरी भाभी एक हाउस वाईफ है/ desi kahani

दोस्तों यह उस रात की बात है जब नागपुर में तूफान की बजह से 24 घंटे से बिजली नहीं आ रही थी और शायद वो अमावस्या की रात थी, वो बिल्कुल अँधेरी और बादलो से घिरी हुए जिसके बीच-बीच मैं बादल भी गरज रहे थे/ दोस्तों वैसे तो मेरे पापा हर दिन शाम के करीब 6 बजे तक घर पर आ जाते है, लेकिन ना जाने क्यों उस रात के दस बज रहे थे और मेरे पापा का कहीं भी कोई पता नहीं था, उनका मोबाइल फोन भी बंद था और मेरी बहुत कोशिश के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा था/ मैंने उसने ऑफिस मैं भी फोन किया तो कोई वहां पर भी फोन उठा नहीं रहा था/ मैं बहुत परेशान थी और बादलों की उन जोरदार गर्जना की वजह से मेरा मन बार-बार कांप उठता और बाहर बड़ी ग़ज़ब की बरसात हो रही थी और बार-बार बदल ज़ोर-ज़ोर से आवाज करके मुझे डरा रहे थे और अब दस बजने को थे कि तभी अचनाक दरवाजे पर दस्तक हुई/ फिर मैंने खिड़की खोलकर देखा तो दरवाजे पर एक रिक्शे वाला खड़ा हुआ था और मैं उसको देखकर डर गयी और अब मैं मन मैं भगवान को याद करने लगी और सोचने लगी कि यह कौन है?
papa ne choot mari 
फिर मैने टॉर्च की रोशनी में देखा तो बाहर मेरे पापा भी थे और एक रिक्शे वाला उन्हे अपने रिक्शे से उतारने की कोशिश कर रहा था/ फिर मैंने आगे बढ़कर दरवाजा खोला और उस रिक्शे से अपने पापा को उतारा, वो बिल्कुल भीगे हुए थे और बहुत नशे मैं थे/ मैं उनको इस हालत मैं देखकर बड़ी हैरान थी, क्योंकि मेरे पापा को इससे पहले मैंने कभी भी इस हालत मैं नहीं देखा था/ फिर मैं पापा को अपने साथ लेकर अंदर आ गयी और मैंने उनको अपने कमरे मैं बैठा दिया/ उसके बाद मैंने एक-एक करके उनके गीले कपड़े उतारने शुरू किए शर्ट और बनियान को उतारकर मैंने उनके बदन को टावल से रगड़-रगड़ कर सूखा दिया और अचानक उनकी पेंट के ज़िप भी खोल दी, लेकिन वो इतने ज्यादा नशे मैं थे कि उनको पता ही नहीं चल रहा था कि मैं क्या कर रही हूँ/

उनकी ज़िप खोलने के बाद मैंने पेंट को नीचे उतार दिया तो मैंने देखा कि उनका अंडरवियर भी बिल्कुल भीगा हुआ था, इसलिए मैंने उसको भी उतार दिया, लेकिन उसके बाद अंदर से जो सब मैंने देखा उसको देखते ही मेरे बदन मैं ४४० वॉल्ट के करंट का झटका लगा और मेरे पूरे बदन मैं अजीब सी सुरसुरी होने लगी/ फिर जैसे ही मैं उनका बदन उसके बाद अब पैरों को साफ कर रही थी तो मेरा हाथ गलती से उनके गधे जैसा लम्बे और मोटे लंड पर चला जाता और वो लंड महोदय अब खड़े होने की तरफ बढ़ने लगे और देखते ही देखते वो अपने पूरे शबाब पर आ गए और तनकर मेरे सामने खड़े हो गए/ पापा का लंड का सुपाडा बहुत मोटा आल्लू जैसा था अब मैं कभी पापा को देखती जो अभी भी उसी मदहोशी मैं थे और कभी उनके लंड को देखती जो पूरी तरह से तैयार था और खंबे की तरह तनकर खड़ा था/

papa se choot marwai

मैंने पहले भी पापा की अलमारी को खोलकर कई सेक्स की किताबे पड़ी थी और अब मेरा मन ललचाने लगा और सभी रिश्तों को भुलाकर मेरा मन हो रहा था कि मैं उनके लंड को चूस लूँ, लेकिन वो मेरे बाप थे और मैं उनकी लड़की तो ऐसा कर पाना संभव नहीं था इसलिए मैं अपने मन की इच्छाओ को मारने की कोशिश करने लगी, लेकिन अंत मैं सेक्स जीत गया और मैं उनके लंड को अपने मुँह मैं लेकर उसको धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगी/ उसके कुछ देर बाद धीरे धीरे मेरी तेज़ी बढ़ गई मैं ज़ोर-ज़ोर से उनके लंड को अपने मुँह मैं अंदर बाहर करने लगी और देखते ही देखती करीब दस मिनट के बाद मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे मुँह मैं मेरे पापा लंड का वीर्य था जो करीब 100 ग्राम तो होगा ही उसकी वजह से मेरा पूरा मुँह भर गया और मैं वीर्य को निगलने लगी/

 baap beti ki chudai

मुझे ऐसा करने मैं बहुत ही मज़ा आ रहा था, क्योंकि मैंने ज़िंदगी मैं पहली बार किसी के वीर्य को देखा और उसको महसूस करके अपने मुँह मैं लिया था/ ना वो बहुत मीठा ना बहुत तीखा बिल्कुल बेस्वाद सा, लेकिन उसको निगलना ही मुझे अच्छा लगा तो इसलिए मैंने उसको निगल लिया/

अब मैं पूरी तरह से सफाई करके पापा को कपड़े पहनाने लगी और इस पूरी प्रतिक्रिया मैं मेरा क्या हाल था? मैं आप लोगों को आगे बताती हूँ/ दोस्तों मेरे शरीर का एक एक अंग हिला जा रहा था और मेरे निप्पल बिल्कुल तनकर खड़े थे और मेरी चूत का हाल भी बड़ा बुरा था, वो तप तपकर बह रही थी, लेकिन मैं क्या कर सकती थी पहले अपने बाप को ठीक कर लूँ उसके बाद मैं अपनी सुध लूँगी, क्योंकि अब तो पापा का लंड भी झड़कर पूरा ढीला पड़ गया था ढीला लंड भी सात इंच का लंग रहा था इसलिए मेरी चुदाई का तो सवाल ही नहीं था और मुझे अपनी चुदाई अधूरी रहने का डर भी मन ही मन सता रहा था/

अब पापा को पजामा पहनाकर ऊपर शर्ट पहनाकर मैं रसोई मैं चली गयी और जल्दी से कुछ खाकर पापा के पास आ गई और फिर मैं उनकी देखभाल के लिए उनके पास ही बैठ गई/ फिर करीब दो घंटे हो गये होगे उसके बाद मेरी आँख लग गयी और मैं पापा पर ही बेहोश होकर पड़ गयी/ फिर जब मुझे होश आया तो पापा को भी होश आ चुका था और वो कुछ होश मैं आ रहे थे, लेकिन दोस्तों अब इस हादसे के बाद मेरी हालत बहुत खराब थी, मैंने पापा को जगाया और उनसे पूछा कि आपके क्या हाल है? वो धीरे से बोले कि ठीक है इतना सुनते ही मैं पलटी और अपने रूम की तरफ जाने लगी/ तो पापा ने मुझसे कहा कि आज तुम भी इधर ही सो जाओ/

अब मैं यह बात सुनते ही पापा के पास लेट गयी और मैंने पापा का एक हाथ अपने सर के नीचे रख लिया/ फिर थोड़ी ही देर बाद मैंने देखा कि पापा का एक हाथ मेरे मम्मे को सहला रहा था और वो धीरे धीरे मसल रहे थे/ मैं चुपचाप पड़ी आनंदित हो रही थी और चाह रही थी कि क्यों ना मैं पापा से आज चुद जाऊँ, क्योंकि पापा के मम्मी को चोदने के बाद शायद ही किसी औरत से सम्बंध रहे हो और उनके मसलने मैं मुझे भी अब बहुत आनंद आने लगा और मैं पापा की तरफ़ मुँह कर लेट गयी/ फिर पापा ने मेरे मुँह पर एक जोरदार किस किया और मेरी नाइटी के ऊपर के बटन खोल दिए और सहलाने लगे/ मैं धीरे धीरे मोन कर रही थी और मेरे मुँह से आवाज़े आने लगी उहह्ह्ह्ह पापा अहहह्ह्ह पापा धीरे से करो ना और अब पापा ने धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को किस करना शुरू किया/

मेरी हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी और मैं अब मन ही मन सोचने लगी कि इतनी प्यास लगाकर मेरे पापा बुझाएगें कैसे, क्योंकि मैं उनका लंड तो पहले ही खाली कर चुकी हूँ, लेकिन मेरे पापा बहुत चतुराई से मेरे बदन को चूम चाट रहे थे और वो धीरे धीरे मेरी चूत के पास पहुँचते जा आ रहे थे/ अब उन्होंने मेरी चूत के पास जाकर चूमना शुरू किया तो मेरे आनंद की कोई सीमा ही नहीं थी/ मैं मन मैं सोच रही थी कि पूरी ज़िंदगी ही इस तरह बीत जाए,

पापा चूमते रहे और मैं उनसे अपना काम करवाती रहूं/ फिर तभी मेरा हाथ अचानक पापा के लंड पर गया तो मैंने देखा कि धीरे धीरे अब वो एक बार फिर से तैयार हो रहा है और पापा ने मेरे ऊपर आते हुए मेरी पूरी नाइटी को खोल दिया और उन्होंने मुझे बिल्कुल नंगा करके मेरी चूत की फांको को फैलाने लगे/ उनका लंड मेरी बिना चुदी कुंवारी चूत मैं घुसने का प्रयास करने लगा और धीरे से एक एक इंच अंदर जाने लगा/ दोस्तों मैं कोई सोलह वर्ष की तो थी नहीं जो मुझे लंड को अपनी चूत के अंदर लेने मैं बहुत तकलीफ़ होती और वैसे भी मैंने बरसो इस दिन का इंतज़ार किया था/

अब मेरे दोनों पैर खुले हुए थे और मेरे पापा मेरी चूत के होंठो को खोलकर लंड को अंदर डालने की कोशिश मैं लगे थे और वो धीरे धीरे उसमे सफल भी हो रहे थे, क्योंकि पापा का लंड धीरे धीरे अंदर जा रहा था और मैं आनंद की प्रक्रिया मैं हिस्सा ले रही थी, वैसे मुझे थोड़ा सा दर्द जरुर हुआ, लेकिन उसको बर्दाश्त तो मुझे ही करना था और मैं वही कर रही थी और पापा मेरे मम्मे को मसल रहे थे और लंड को मेरी चूत के अंदर डालने की कोशिश मैं लगे थे/

अब मैं मन ही मन पापा को थैंक्स कह रही थी, लेकिन पापा ने जब पूरा लंड अंदर डालकर jhatake मारने शुरू किए तो मुझे बहुत दर्द का अहसास होने लगा और वो दर्द भी बढ़ने लगा उसकी वजह से मैं धीरे-धीरेचीख रही थी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ आहह ईईईई उईईई पापा प्लीज़ धीरे धीरे करो ना, लेकिन पापा पर एक अलग ही जोश चड़ा था और वो धीरे धीरे अपने झटके की तेज़ी को बढ़ाए जा रहे थे, जिसकी वजह से मेरा बड़ा बुरा हाल था, लेकिन एक अलग सा मज़ा भी आ रहा था जिसको किसी भी शब्दो मैं नहीं लिखा जा सकता/ अब वो मेरी चूत के रास्ते मेरे शरीर के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे और अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे हम दो शरीर एक जान है/

फिर मैं इतने मैं झड़ यानि choot से पानी छोड़ चुकी थी, लेकिन वो लगातार jhatake देकर मुझे चोदे ही जा रहे थे/ फिर आख़िर एक बार झड़ने के बाद मुझे एक बार फिर से आनंद आने लगा और मैं इच्छा कर रही थी यह अनुभूति मुझे सुबह तक होती रहे और उसके बाद मैं एक बार फिर से उतेज़ित हुई और कुछ देर बाद दोबारा से झड़ गई और इतने मैं पापा भी झड़ गये/ मुझे ऐसा लगा कि जैसे किसी ने शीशा गरम करके मेरी चूत मैं डाल दिया हो और वो सबसे अच्छा अहसास था जिसको मैं किसी भी शब्दों मैं नहीं लिख सकती/ फिर एक दूसरे के शरीर पर हम दोनों पड़े रहे और सो गये/
desi kahani hindi me 
फिर दूसरे दिन सुबह जब मैं सोकर उठी तो देखा करीब 8 बजे थे और काम वाली बाई भी अब आने वाली थी, इसलिए तुरंत उठकर मैंने चाय बनाई और पापा को जागने चली गयी, पापा जो मेरे ही रूम मैं सो रहे थे वो बिल्कुल नंगे पड़े हुए थे और उनका लंड खड़ा था और पेट मैं टेंट बना था/ मुझे उसकी शरारत को देखकर हँसी आ गयी कि रात भर इसी ने उपद्रव मचाया था और अब भी यह सिपाही की तरह तनकर खड़ा है, वो सब देखकर मुझे अपनी चूत मैं एक बार फिर से सुरसुरी सी महसूस होने लगी, लेकिन वो मेरी काम वाली बाई मीना बाई के आने का टाइम था, इसलिए पापा को उठाकर और चाय पिलाकर मैं जैसे ही मुड़ी तो पापा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और वो अपने लंड की तरफ इशारा करके बोले इसे भी तो देखो, यह क्या कह रहा है?

तो मैंने पापा को कहा कि काम वाली बाई आने ही वाली है, आप अपने कपड़े पहन लो, लेकिन पापा की ज़िद थी कि इसको एक बार तुम चुप जरुर करा जाओ/ तभी मैंने तेज़ी से उनका लंड अपने मुँह मैं लिया और फिर मैं जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करने लगी/ अभी हम किसी मुकाम पर पहुंचे भी नहीं थे कि बाहर घंटी बजी और तुरंत मैंने अपने कपड़े ठीक किए और बाहर की तरफ भागी और बाहर जाकर मैंने देखा तो वो काम वाली बाई का लड़का खड़ा था, वो मुझसे कह रहा था कि आज मम्मी की तबीयत खराब है इसलिए वो आज काम करने नहीं आ पाएगी/

दोस्तों उसके मुँह से यह बात सुनकर मैं मन ही मन बहुत खुश हो गई और मैं भागकर दोबारा पापा के पास चली गई, लेकिन तब तक वो चिराग बुझ चुका था और पापा अपने कपड़े पहनकर बाथरूम मैं घुस चुके थे और बाथरूम के अंदर से आवाज़ आ रही थी कि ममता मेरा टावल देना तो प्लीज़, मैंने टावल लेकर बाथरूम के बाहर खड़े होकर आवाज़ लगाकर उनसे कहा कि आज काम वाली बाई नहीं आई है, इसलिए टावल बाहर पड़ा है और मैं किचन मैं खाना बनाने जा रही हूँ/

तभी वो बोले कि नहीं तुम टावल को अंदर ही दे जाओ, मैंने उनसे कहा कि दरवाजा खोलो और तभी उन्होंने दरवाजा खोल दिया/ मैंने देखा कि पापा अपने अंडरवियर मैं खड़े थे और मेरा अधूरा छोड़ा गया काम वो पूरा कर रहे थे, यानी कि वो मुठ मार रहे थे/ फिर मैंने उनसे कहा पापा यह क्या कर रहे हो? तो वो बोले कि कोई काम अधूरा नहीं छोड़ा जाता इसलिए मैं इसे पूरा कर रहा हूँ/

अब मैंने तुरंत नीचे घुटनों के सहारे बैठकर लंड को उनके हाथ से छीनते हुए अपने मुँह मैं ले लिया और अंदर बाहर करने लगी और जैसे ही मैं यह काम तेज़ी से कर रही थी तो मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे उनका लंड मोटा होता जा रहा है और अब वो मेरे मुँह मैं समा नहीं पा रहा, लेकिन फिर लंड मेरे मुँह मैं फिट हो गया और कुछ देर बाद एक ज़ोर से पिचकारी छोड़ते हुए उन्होंने अपना गरम गरम वीर्य मेरे मुँह मैं भर दिया और मैंने अपने मुँह मैं लेकर पापा की तरफ देखा तो वो मुस्कुराकर बोले तुम्हारा तो नाश्ता पूरा हो गया/ फिर मैं उसे गटककर हंसकर बोली हाँ पापा अभी यह नाश्ता है और फिर दोपहर को लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाकर दिन का खाना लूँगी और फिर देर रात को गांड मरवाकर रात का खाना/ आज की सभी डिश तो एक से बढ़कर एक रहेगी, लेकिन समय अलग अलग रहेगा/

दोस्तों पापा को ऑफिस जाना था, इसलिए मैं कुछ देर बाद पीछे हट गयी और पापा नहाकर तैयार होने लगे/ फिर मैंने कहा कि पापा लंच पर आएँगे या मैंने भूखी रहूंगी? तो पापा ने मेरी तरफ देखा और वो हंसकर बोले अरे मैं ऑफिस कहाँ जा रहा हूँ, मैं तो बाहर सिर्फ़ हवा खाने जा रहा हूँ, हाज़री लगाकर मैं तुरंत लौट आऊंगा और फिर कुछ देर बाद पापा दफ़्तर चले गये/ मैं सोचने लगी जो कुछ हुआ क्या ठीक हुआ? मेरा मन कहता नहीं और कभी कहता कि चलो सब ठीक है/ फिर कुछ देर बाद पापा आ गये और वो मुझे लेकर बेडरूम मैं चले गये और उन्होंने मेरी नाइटी को खोल दिया और मेरे मम्मे को दबाने लगे/ मुझे बड़ा आनंद आ रहा था और मेरी चूत मैं एक अजीब सी खलबली मची हुए थी,

वो मेरे पूरे बदन को चूम रहे थे कि तभी अचानक से वो बोले क्यों ममता तुम्हारे मम्मे तो तुम्हारी माँ से बहुत बड़े है, क्या तुम कोई दवाई काम मैं लेती हो या फिर अपने हाथ से खींचती या किसी के हाथ से खिंचवाती हो?

तो मैंने कहा कि नहीं पापा यह सब कुछ प्राक्रतिक है कोई दवाई नहीं, किसी तरह की कोई खिंचाई नहीं/ फिर पापा ने मुझे बेड पर लेटा दिया और वो मेरी चूत की फांके खोलकर बहुत ध्यान से देखने लगे और धीरे-धीरेचूत मैं अपनी ऊँगली को अंदर बड़ा रहे थे/ मेरी हालत इतनी खराब थी कि मुझे कुछ देर बाद ही झड़ने का अहसास होने लगा और मेरी चूत से निकले रस की वजह से मेरे बाप के हाथ गीले हो गये, वो अपने हाथ चाटने लगे तो मैंने उनसे कहा कि पापा अगर चाटना ही है तो मेरी मुँह को चाटो/

मेरे मुँह से यह बात सुनकर वो तुरंत नीचे झुककर मेरी चूत पर अपनी जीभ को फेरने लगे और चाटने लगे/मेरी चूत पानी छोड़ने लगी फिर मैं उनका लंड अपने हाथ मैं लेकर चूमने लगी और हम दोनों 69 की पोजीशन मैं आ गए और कुछ देर बाद उनका भी वीर्य निकल गया, वो मेरे मुँह मैं जा रहा था और कुछ देर बाद पापा का लंड मैंने चाट कर शख्त और कठोर कर दिया अब वो मेरे ऊपर सवारी कर रहे थे और उनका सांप जैसा लंड मेरी चूत रानी के अंदर प्रवेश कर गया और उसके बाद से शुरू हुई झटके की भरमार, क्योंकि दोनों का पानी अंदर मिल रहा था और इसलिए मेरी चूत से फट फट और फ़च फ़च की आवाज़े आने लगी थी/ मुझे भी अजीब सी ख़ुशी मिल रही थी इसलिए मैं हल्की आवाज से चीख रही थी और मोन भी कर रही थी उहह्ह्ह अहह्ह्ह्हह ऑचचछ्ह्ह्हह्ह माँ मर गई, लेकिन मुझे मज़ा बहुत आ रहा था/

दोस्तों पापा खुद भी अपने लम्बे और मोटे लंड के जोरदार jhatake देकर मुझे लगातार चोदे जा रहे थे उनका लंड बिल्कुल पिस्टन की तरह मेरी चूत मैं चल रहा था और अंदर बाहर हो रहा था और फिर देखते ही देखते वो झड़ गये और उन्होंने अपना वीर्य अंदर ही डाल दिया, जिसकी वजह से मेरी चूत मैं ऐसा लगा जैसे किसी ने गरमा गरम लोहा डाल दिया हो मेरी चूत मैं अब आनंद की कोई सीमा नहीं थी इसलिए मैं बहुत मस्त थी और अपने पापा से अपनी चुदाई करवा रही थी/ तो उसके बाद हम दोनों बहुत ज्यादा थककर एक दूसरे से चिपककर लेटे रहे, लेकिन मेरी चुदाई का यह दौर ऐसे ही चलता रहा और मैंने अपने पापा के लंड से अपने हर एक छेद को उनके वीर्य से पूरा भर दिया बहुत मज़े किए/


दोस्तो, कैसे लगी ये कहानी आपको,




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