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tution teacher didi ko choda


मैं पड़ोस में टीचर दीदी से पढ़ने जाता था. एक दिन दीदी को माहवारी आयी हुई थी तो उन्होंने नहीं पढ़ाया. मैं उनसे उनकी तबीयत की पूछताछ करने लगा तो वो खुल गयी.


मेरी ट्यूशन वाली दीदी का नाम कोमल था. आज इस सेक्स कहानी में मैं आपको बता रहा हूँ कि कैसे उन्होंने मुझे प्यार करना सिखाया और चोदना भी सिखा दिया.

उस समय मैं बारहवीं में पढ़ता था और अपने पड़ोस में रहने वाले अंकल के घर ट्यूशन पढ़ने जाता था. उनके यहां बहुत सारे बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन बारहवीं क्लास का मैं अकेला ही स्टूडेंट था. वो मुझे 2-3 घंटे तक पढ़ाती थीं.

एक दिन में शाम को 4 बजे उनके घर गया, तो उस समय दो लड़कियां थीं. वे दसवीं में पढ़ती थीं, वो वापस निकल रही थीं.

मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ?
उन्होंने बताया कि दीदी की तबीयत ठीक नहीं है. वे आज छुट्टी पर हैं.

मैं ये सुनकर भी अन्दर आ गया और दीदी को देखा. वो उस कमरे में नहीं थीं. मैं वहीं बैठकर उनके आने का इंतजार करने लगा.

दीदी कुछ देर बाद बाथरूम से निकलीं और कमरे की तरफ आईं. मैंने उनसे नमस्ते की, तो उन्होंने कहा- तुम कल आ जाना … आज मेरी तबियत ठीक नहीं है.

मैंने ओके बोल कर अपना बैग उठाया और घर की तरफ चल दिया.

घर जाकर मम्मी ने पूछा कि आज इतनी जल्दी कैसे आ गया?
मैंने कहा- आज छुट्टी है.
मम्मी ने पूछा- काहे की छुट्टी … क्या हुआ?
मैंने बताया कि दीदी की तबीयत ठीक नहीं है.
मम्मी ने कहा- अरे क्या हुआ है उसे?
मैंने कहा- मुझे नहीं पता.
मम्मी बोलीं- अरे पूछ कर तो आ सकता था. डॉक्टर के पास ले जाता, उसकी मम्मी घर में नहीं हैं और उसके पापा ड्यूटी पर गए हैं.
मैंने कहा- मैं अभी जाता हूं.

मैं दोबारा कोमल दीदी के घर के लिए निकल गया. मैंने दरवाजा देखा, तो वो बंद था. मैंने डोरबेल बजाई, कोई उत्तर नहीं मिला, तो मैंने एक दो बार और बजा दी. इसके बाद दीदी ने दरवाजा खोला. वो टी-शर्ट लोवर पहनी हुई थीं. इस ड्रेस में उन्हें देखकर मुझे अजीब सा लगा. मुझे समझ आ रहा था जैसे उन्होंने नीचे ब्रा नहीं पहनी हो.

मैं बस उन्हें देखता रहा.

दीदी ने कहा- क्या हुआ शिव … कुछ भूल गए हो क्या?
मैंने कहा- दीदी … मम्मी ने बोला कि आपको डॉक्टर के पास ले जाऊं.
दीदी बोली- अरे ऐसी कोई बात नहीं है. मैं ठीक हूं … बस पेट में ज्यादा दर्द है … इसलिए नहीं पढ़ाया.

मैंने कहा- तो आप मुझे बता दो, मैं दवाई ले आऊंगा.
दीदी बोलीं- नहीं … मुझे दवाई नहीं चाहिए. … वो मेरे पास घर में ही है.
मैं बोला- आप घर में अकेली हो, मैं आपके पास रुक जाता हूँ … शाम तक आपके पापा आ जाएंगे … तब चला जाऊंगा.

इस पर दीदी बोलीं- तुम घर जाकर होमवर्क करो … मुझे भी काम है.
मैं बोला- कल सन्डे है … मैं कल कर लूंगा. आपको क्या काम है … मैं आपकी हेल्प कर देता हूं.
मेरी बात पर दीदी ने हार मान ली और बोलीं- अच्छा तुम अन्दर आ जाओ और दरवाजा बंद कर देना.

वो वापस अन्दर जाने के लिए मुड़ीं, तो मेरा ध्यान उनके चूतड़ों की तरफ चला गया. लोअर में दीदी के चूतड़ काफी मोटे लग रहे थे.

फिर मैंने अन्दर आकर देखा, तो दीदी एक चादर ओढ़ कर बेड पर लेटी हुई थीं और टीवी देख रही थीं. मैं भी उनके पास बैठ कर टीवी देखने लगा.

कुछ देर टीवी देखने के बाद मैंने कराहने की आवाज सुनी, तो दीदी की तरफ देखा. वो बेड के सहारे पेट पकड़ कर बैठी हुई थीं.
मैंने दीदी से पूछा- क्या हुआ?
वो बोलीं- बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- अपने दवाई तो ले ली है? उन्होंने हां का इशारा किया.
मैं- तो अब क्या करूं दीदी?

मैं उनके बिल्कुल पास चला गया और पेट पर हाथ रखने लगा. उन्होंने अपने पैर मोड़ दिए और मेरा हाथ अपनी जांघ पर रख दिया.

मुझे उनके लोवर के अन्दर कुछ बड़ा सा महसूस हुआ, तो मैंने कहा- आप लेट जाइए … मैं आपका पेट दबा देता हूं.
वो- नहीं … हाथ भी मत लगाना … दर्द होता है.
मैंने कहा- नहीं … मैं अपनी मम्मी का भी सर दबा कर उन्हें ठीक कर देता हूं. आप लेट जाओ.

वो मान गईं.

मैं दीदी के पेट पर धीरे धीरे हाथ से दबाने लगा और वो आंख बंद करके लेटी रहीं. मैं पेट दबाते हुए उनकी चूची को भी छू लेता था, पर उन्होंने कुछ नहीं बोला.

कुछ देर बाद मेरे मन में उत्सुकता जागी और मैंने अपना हाथ पेट से नीचे लगाना चाहा.
कोमल दीदी बोलीं- हां यही पर दर्द है … यहीं दबाओ.

मैं बड़ी सावधानी से धीरे धीरे पेट के थोड़ा नीचे दीदी को सहलाने लगा. वो आंख बंद करके लेटी थीं और उनके मुँह से आवाज भी आना कम हो गई.

मेरा हाथ अब लोवर की इलास्टिक पर था और मैं उनकी नाभि को महसूस कर सकता था.

करीब दस मिनट ये सब करने के बाद कोमल दीदी शायद सो गईं, तो मैं भी उनके पास ही लेट गया. लेकिन उनकी चूत वाला उभरा हुआ हिस्सा मेरी जिज्ञासा बढ़ा रहा था. मैं ये सब ख़्याल के साथ कोमल दीदी के पास लेटा रहा.

तभी दीदी ने करवट बदली और मेरी तरफ चेहरा कर लिया. उनकी सांस लेने की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी और उनका गोरा चेहरा मुझे लाल दिख रहा था.

मैंने रिमोट उठा कर टीवी बंद कर दिया, तो दीदी की आंख खुल गई और बोलीं- क्या हुआ शिव?
मैंने कहा- दीदी मैं घर जा रहा हूं. अब काफी देर हो गई … मुझे थोड़ी देर खेलने भी जाना है.
इस पर दीदी बोलीं- अभी तो 6 बजे हैं … तुम कुछ देर और रुक जाओ न.
मैंने कहा- ठीक है दीदी.

कोमल दीदी बेड से उठ कर बाथरूम की तरफ गईं और कुछ देर बाद वापस आ गईं. उन्होंने मुझसे मेरे पीछे रखे तौलिया को मांगा, तो मैंने दे दिया.

मैंने कहा- दीदी अब तो दर्द नहीं है न!
दीदी बोलीं- हां अब नहीं है.
मैंने कहा- देखा दीदी … मैं सबको ठीक कर देता हूं … इसलिए मैं डॉक्टर ही बनूंगा.
दीदी हंस कर बोलीं- क्या इसी लिए तूने +2 में बायोलॉजी लिया है?
मैंने कहा- हां दीदी.
दीदी बोलीं- चाय पियोगे?

मैंने हां बोला … और दीदी कमरे से बाहर निकल गईं. मैंने एक बार सोचा कि दीदी से पूछ लूं कि उन्होंने लोवर के अन्दर क्या रखा था. फिर मैंने सोचा कि यार जो लोवर के अन्दर था, वो अब कहां चला गया है … दिख ही नहीं रहा है.

मैं ये जानने के लिए दीदी के पीछे पीछे किचन में गया और उनसे बोला- दीदी एक बात पूछूं?
दीदी बोलीं- हां बोलो … क्या हुआ?
मैंने कहा- जब मैं घर आया था, तो आपके लोवर के अन्दर कुछ मोटा मोटा रखा हुआ था … वो क्या था!
दीदी एकदम पलट कर बोलीं- लोवर में ऐसा तो कुछ नहीं था.
मैंने कहा- दीदी मुझे लगता है उसकी वजह से ही आपके पेट में दर्द हुआ था.
दीदी बोलीं- नहीं ऐसी बात नहीं है. मुझे दो दिन से पीरियड्स थे, उसकी वजह से दर्द हुआ था.
मैंने कहा- दीदी ये पीरियड्स कौन सी बीमारी है?
दीदी बोलीं- ये बीमारी नहीं है … बस रूटीन है … जो हर महीने होती है और सब लड़कियों को होती है.
मैंने कहा- तो ये मम्मी को भी होती होगी?

इस पर दीदी बोलीं- शादी से पहले होती होगी. … पर अब शायद आपकी मम्मी को नहीं होती होगी.
मैंने कहा- तो राधिका को होती होगी. कोमल दीदी बोलीं- हां उसको तो होती होगी.
मैंने कहा- तो वो लोवर के अन्दर क्या था … वो तो बताओ?
दीदी बोलीं- अरे कपड़ा था वो.
मैंने कहा- ओके तो राधिका तो अपनी जींस में इतना मोटा कपड़ा नहीं रखती.

कोमल दीदी बोलीं- शिव कल सन्डे है … तो मैं तुम्हें आराम से सब कुछ बताऊंगी. तुम अभी खेलने जाओ और हां हमने जो बात की, वो तुम अपनी मम्मी और राधिका या किसी और को मत बताना.
मैंने कहा- ठीक है दीदी … मैं कल आऊंगा.
दीदी बोलीं- सुबह दस बजे ही आ जाना.

मैं ओके बोलकर निकल गया और पूरी रात दीदी के बारे में सोचता रहा.

अगली सुबह मैं सो कर उठा, तो 7 बज गए थे … पर स्कूल की छुट्टी होने की वजह से मम्मी ने गुस्सा नहीं किया. मैं फ्रेश होने के लिए गया, तो मेरे हाथ मेरे लंड से छू लिया और मैं कोमल दीदी के पेट पर हाथ रख कर उनकी चूची व नाभि के बारे में सोचने लगा. इससे मेरे शरीर में अजीब सी गुदगुदी होने लगी.

मैंने सोचा कि मैं अभी कोमल दीदी के घर जाऊंगा.

मैं बाहर निकला और नहाने के लिए कपड़े लेने कमरे में गया, तो मम्मी के साथ कोमल दीदी बात कर रही थीं. उन्होंने मेरी तरफ देखा, तो मैंने उन्हें नमस्ते किया. वो मेरे लंड की तरफ देख रही थीं, जो लोवर में उभरा हुआ था.

मैंने उनकी नजर का पीछा किया, तो झट से अपने हाथ से लोवर को ढका और कपड़े लेकर बाथरूम जाने लगा.

मम्मी बोलीं- जल्दी नहा लो … फिर तुम्हें कोमल के घर जाना है. उसकी मम्मी आज भी नहीं आएंगी.
मैंने हां कहा … और बाथरूम में घुस गया.

मैंने नहा कर ब्रेकफास्ट किया और कोमल दीदी के घर की तरफ निकल गया. कोमल दीदी के घर का दरवाजा खुला हुआ था.

मैं अन्दर गया, तो उसके पापा बोले- बेटा तुम बाहर वाले कमरे में बैठ जाओ. वो ब्रेकफास्ट करके तुम सबको पढ़ा देगी. मुझे काम से गांव जाना है.

उसके पापा गांव के लिए निकल गए. मैं वहीं बैठ गया.

दीदी ने कहा- शिव, दरवाजा बंद कर दो और लॉक कर देना.
मैंने कहा- क्यों और सब पढ़ने नहीं आएंगे क्या?
वो बोलीं- वो सब शाम को आएंगे.

मैंने गेट लॉक किया और अन्दर आ गया.

दीदी किचन में थीं. उन्होंने बर्तन साफ किए और बोलीं- तुम पढ़ने आए हो क्या?
मैंने कहा- हां.
वो बोलीं- शाम को पढ़ते हैं. अभी तो मैं अकेली थी, इसलिए बुलाया है. मेरे पेट में आज भी दर्द है.
मैंने कहा- अरे दीदी फिर तो तुम लेट जाओ … काम मत करो.
दीदी बोलीं- बस हो गया … चलो.

हम दोनों उनके कमरे में आकर बेड पर बैठ गए.

दीदी बोलीं- तो तुम क्या पूछ रहे थे?
मैंने कहा- दीदी आपको कहां दर्द है?

दीदी लेट गईं और पेट पर हाथ रख कर बोलीं- कल भी यहीं था.

मैं उनका पेट सहलाने लगा, तो वो मेरी तरफ देखने लगीं. मैं शर्माकर उनसे आंखें नहीं मिला पा रहा था. मैं पेट सहला कर उनके चूची को भी छू रहा था. जब मैं नीचे की तरफ गया, तो आज उनकी लोवर की इलास्टिक काफी नीचे थी. मैंने पेट सहलाना जारी रखा … पर अब मैं उनकी इलास्टिक से नीचे भी सहलाने लगा था. मुझे नीचे की तरफ महसूस हुआ, जैसे उनकी लोवर में अब कुछ नहीं था.

मैंने बोला- दीदी आज आपका लोवर में वो नहीं है?
दीदी बोलीं- क्या नहीं है?
मैंने कहा- वो मोटा मोटा सा.
दीदी हंस कर बोलीं- वो मोटा तो तुम्हारे पास है.

मैंने हैरानी से उनकी तरफ देखा तो दीदी ने हंस कर आंख दबा दी.

अब दीदी मेरा क्या मोटा कह रही थीं और कैसे मेरा मोटा लंड दीदी की चुत में घुस सका.


मैंने कहा- नहीं दीदी … वो कपड़े जैसे मोटा मोटा.
दीदी बोलीं- अरे वो मुझे पीरियड्स में खून आता है … तो कपड़े खराब ना हो जाएं, इसलिए पैड लगाया था.
मैंने कहा- दीदी पीरियड्स क्या होता है?
कोमल दीदी बोलीं- मैं बता तो दूंगी, पर तुम प्रॉमिस करो कि किसी और को नहीं बताओगे.

मैंने उनके हाथ पर हाथ रख कर प्रॉमिस किया.

दीदी बोलीं- तुम लेट जाओ.

मैं लेटने को हुआ तो दीदी ने मेरे हाथ को पकड़ कर खींच लिया. मैं उनके ऊपर गिर गया. मेरा मुँह उनके कंधे पर था और चूची पर गर्दन रखी हुई थी.

कोमल दीदी ने कहा- सुनो तुमने पढ़ा होगा कि शादी के बाद बच्चे पैदा होते हैं.
मैंने कहा- हां.
वो बोलीं- जब सेक्स होता है … तो लड़की की वेजिना के अन्दर, लड़का अपना पेनिस डालता है और स्पर्म अन्दर छोड़ता है … और फिर लड़की उस स्पर्म की हेल्प से बच्चे पैदा करती है. लेकिन जब लड़की के अन्दर स्पर्म नहीं जाता, तो लड़की उस बच्चे को नहीं बना पाती और अपनी सारी ताकत हर महीने पीरियड्स में निकाल देती है.

मैं चुप होकर ये सब सुनता रहा.

दीदी बोलीं- कुछ समझ आया?
मैंने हां कहा, तो वो बोलीं- अब समझ आया कि पीरियड्स क्या होता है?
मैंने कहा- पीरियड्स तो समझ आ गया … पर ये वेजिना क्या होती है … ये नहीं पता.

दीदी ने मेरा हाथ अपनी चूत पर रख दिया और बोलीं- ये वेजिना है.
मैंने कहा- ये तो चूत है.
उन्होंने मुझे धक्का देकर उठा दिया और बोलीं- ये किसने बताया तुम्हें?
मैंने कहा- स्कूल में सब बोलते हैं कि लड़की की चूत होती है और लड़कों का लंड होता है.
दीदी बोलीं- तुम्हें तो सब पता है और तुम मेरा मजाक बना रहे हो.
मैंने कहा- नहीं दीदी … बस ये ही पता था और कुछ नहीं.

कोमल दीदी सोचते हुए बोलीं- सुबह जब मैं घर आई थी, तब तुम मुठ मार रहे थे बाथरूम में?
मैंने कहा- नहीं दीदी.
कोमल दीदी बोलीं- तो तुम्हारा वो मोटा कैसा हुआ … और तुमने हाथ से छुपाया भी था.
मैंने कहा- नहीं … मुझे सच में नहीं पता कि वो कैसे मोटा हो गया था. पर जब मैं सुबह फ्रेश होने गया, तो मुझे आपकी याद आ गयी थी … बस तभी से वो मोटा हो गया था.
इस पर दीदी बोलीं- क्या याद आ गया था … सच सच बताना शिव!

ये कह कर दीदी ने मेरे दोनों हाथ अपने हाथ में पकड़ लिए.

मैंने कहा- दीदी जब मैं आपका पेट दबा रहा था, तो मेरा हाथ आपकी चूची और लोवर की इलास्टिक पर छू रहा था.
दीदी बोलीं- हम्म तो तुम्हें मेरी चूची याद आ गयी थी.
मैं बोला- हां दीदी और मेरा लंड बड़ा हो गया था.

दीदी बोलीं- मुझे भी दिखाओगे कि कैसे बड़ा हुआ था.
मैं बोला- दीदी वो तो सुबह बड़ा हुआ था … अब तो काफी देर हो गई.
दीदी बोलीं- मैं फिर से लेट जाती हूं … तू मेरा पेट दबाना और चूची भी छू लेना. पर जब ये बड़ा हो जाए, तो मुझे दिखाना.
मैंने ओके कहा.

दीदी लेट गईं और मैं उनके पेट को सहलाने लगा. वो मेरी तरफ देख रही थीं. मैं थोड़ा डर रहा था. फिर मैंने उनकी चूची को छू लिया, तो वो हल्की सी मुस्कान देने लगीं. मैं नीचे दूसरे हाथ से उनकी लैगी की इलास्टिक छूने लगा. उन्होंने अपनी लैगी की इलास्टिक के अन्दर अपना हाथ डाला और रगड़ने लगीं.

मैं उनकी चूची को छू रहा था.

उन्होंने बोला- मेरी चूची को जोर से दबाओ.

मैंने दोनों हाथों से चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा. वो मादक सिसकारियां भरने लगीं.

मैं उनसे बोला- आपको अच्छा लग रहा है?
दीदी बोलीं- अरे … बहुत अच्छा लग रहा है.
मैंने कहा- दीदी, अब आप मुझे अपनी चूत दिखा दो.

उन्होंने एक हाथ से टी-शर्ट ऊपर की और अपनी लैगी नीचे करके बोलीं- देखो.

मैंने देखा कि अन्दर काले बाल वाली एक चूत थी जो एकदम गोरी थी. मैंने अपना हाथ दीदी की चूत पर रख दिया, तो दीदी बोलीं- कैसी लगी?
मैंने कहा- अच्छी है.
दीदी बोली- तुम इसको अपने होंठों से छू कर देखो.

मैं थोड़ा नीचे की तरफ सरका और गर्दन झुका कर उनकी चूत को होंठों से छूने लगा.

दीदी बोलीं- थोड़ा और नीचे करो … जहां पर बाल नहीं हैं … वहां किस करो.

मैंने उनका हाथ हटा कर उनकी चूत की दोनों फांकों को चूमना शुरू कर दिया. वो अपने हाथों से मेरा सर पकड़ कर सहला रही थीं. मैं उनकी चूत में मस्ती से ही चूमे जा रहा था कि मेरी नाक उनकी चूत को जोर से रगड़ने लगी. वो मेरे सर को इतने जोर से दबाने लगीं कि मेरी सांस रुकने लगी थी. मैंने अपना मुँह खोला, तो उनकी चूत में मेरी जीभ छू गई … और मुझे दीदी की चुत के नमकीन पानी का स्वाद आने लगा.

मुझे दीदी की चुत का स्वाद बड़ा ही मस्त लगा. फिर तो मैं जीभ से उनकी पूरी चूत चाटने लगा. मेरी जीभ ने उनकी चूत की दोनों फांकों के अन्दर जाना शुरू कर दिया. दीदी ने ये महसूस करते ही अपना हाथ मेरी कमर पर रख कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया. मैं अब बिल्कुल लेट सा गया था और दीदी मेरे ऊपर झुक गई थीं. वो अपने हाथ से मेरा सर अपनी चुत पर दबा रही थीं.

अब मैंने दोबारा से उनकी चूत चूसनी शुरू कर दी. कुछ ही पलों में दीदी ने अपने जिस्म को अकड़ाते हुए अंगड़ाई ली और अपना पानी मेरे मुँह पर छोड़ दिया. मेरी नाक और होंठों से चुत का पानी निकल कर बेड पर गिरने लगा. बिस्तर के चादर पर निशान बना गया. मैंने अपना सर उनके हाथ से निकाला और बैठने लगा. दीदी ने मुझे दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से अपने ऊपर गिरा लिया और मेरी कमर को जोर से कस लिया.

दीदी मेरे होंठों को चूसते हुए कुछ बोलीं, तो मुझे समझ नहीं आया. मैंने भी बिना कुछ सुने उन्हें चूमना शुरू कर दिया. मैंने चूमते हुए महसूस किया कि मेरा लंड बड़ा हो गया है.

मैंने दीदी की पकड़ से छूट कर अपना लोवर और निक्कर नीचे करके कहा- दीदी ये देखो … मेरा बड़ा हो गया है.
दीदी ने आगे होकर मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और सहलाना शुरू कर दिया.
दीदी बोलीं- मैं इसे किस करूं?
मैंने हां में सिर हिला दिया.

दीदी बोलीं- तुम लेट जाओ.

मैं लेट गया और दीदी ने दोनों हाथों से सहला कर लंड को और बड़ा कर दिया. कुछ ही पलों बाद दीदी लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं. मुझे लंड चुसवाने में बहुत अच्छा लग रहा था.

दीदी से मैं बोला- दीदी मैं लोवर उतार दूं क्या?
उन्होंने खुद मेरा लोवर और निक्कर दोनों को नीचे खींच कर उतार दिया और अपनी लैगी को पैर मोड़ कर निकाल कर फेंक दिया.

दीदी बोलीं- और कुछ निकालना है?
मैंने कहा- नहीं बस टी-शर्ट को भी. … उन्होंने मेरी बात पूरी होने से पहले ही मेरी टी-शर्ट भी उतार दी और खुद भी बिल्कुल नंगी हो गईं.

मुझे उन्हें नंगा देखकर बहुत अच्छा लगा. दीदी ने फिर से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर दो मिनट बाद मेरे घुटने मुड़ने लगे और मैं कमर उठा कर एकदम सिहर गया. तभी मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया.

कोमल दीदी मेरे लंड का पूरा पानी पी गईं और फिर से लंड चूसने लगीं. अब उनकी स्पीड और ज्यादा हो गई थी.

मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड अब छोटा हो गया था, पर कोमल दीदी ने लंड को छोड़ा ही नहीं. वे लगातार लंड चूसती रहीं.

मैंने बोला- दीदी लंड में दर्द हो रहा है.

वे कुछ नहीं बोलीं … बस लंड चूसती रहीं. मुझे सच में दर्द महसूस हुआ. मैं कमर उठा कर बैठने लगा, तो दीदी ने एक हाथ मेरी छाती पर रख कर मुझे गिरा दिया.

उन्होंने थोड़ी देर लंड चूस कर मुझसे कहा- तुमको मेरी चूची नहीं चूसनी है?

मैंने सोचा कि दीदी की चूचियां चूसूंगा, तो मेरे लंड को दर्द नहीं होगा. मैं उठा और बैठ कर उनकी एक चूची को पकड़ कर दबा दी.
उन्होंने सिसकारी लेते हुए कहा- एक हाथ से एक पकड़ो.

मैंने एक हाथ से एक चूची को पकड़ा और उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. वो मुँह से कामुक आवाजें निकालने लगीं. फिर मैंने दूसरी चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा. अब मुझे मज़ा आने लगा था.

दीदी बोलीं- शिव अब तुम मेरी चूत को होंठों से चूस लो.
मैंने चूची से मुँह हटाया और कहा- दीदी चूत तो आपकी है.
दीदी बोलीं- शिव मैं तो बस इस चूत से परेशान रहती थी … पर आज जो मज़ा तुमने दिया, उसके बाद तो मैं पूरी तुम्हारी हो गई हूँ.

मैंने दीदी से कहा- दीदी, मेरा लंड चूसते हुए तुमने क्या बोला था.
दीदी बोलीं- मैंने आई लव यू बोला था … तुमने इतना मज़ा दिया है मुझे की मुझे इससे आगे कुछ समझ ही नहीं आया.

मैंने दीदी से बोला- दीदी मुझे आपके गाल पर किस करने दो, मुझे आपका चेहरा बहुत अच्छा लगता है.
दीदी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और बोलीं- मेरा सब कुछ तुम्हारा है … जो करना है करो.

मैंने उनके गाल पर किस किया और फिर दूसरे गाल पर चूमा. उनकी चूची को पकड़ कर उनकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा. वो मादक सिसकारियां भरने लगीं और बोलीं- अब बस चूसना बंद करो … अब लंड चुत के अन्दर डाल दे.
मैंने चूची छोड़ कर पूछा- कहां डालने के लिए कहा है दीदी?
कोमल दीदी बोलीं- तुम लेट जाओ … मैं खुद कर लूंगी.

मैं चित लेट गया. दीदी ने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया. लंड फिर से बड़ा हो गया.
कोमल दीदी ने मुझसे बोला- मैं इसे अपनी वेजिना में डालूंगी, तुम बस लेटे रहना.
मैं कुछ नहीं बोला.

दीदी ने मेरे ऊपर आकर अपनी चूत में मेरा लंड सैट किया और डालना शुरू कर दिया. थोड़ा सा लंड अन्दर गया था कि दीदी रुक गईं और उन्होंने एक हाथ मेरी छाती पर रख दिया. फिर दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ कर मेरी तरफ देखा और दो सेकंड के बाद दीदी ने आंख बंद करके दूसरा हाथ भी मेरी छाती पर रख दिया.

उन्होंने अपने घुटने मोड़ कर मेरा लंड अन्दर ले लिया. दीदी मेरी छाती पर गिर गईं और ‘उह आह आह’ की आवाज़ करने लगीं.

दीदी काफी देर तक मेरे ऊपर लेटी रहीं. फिर वे अपने हाथ मेरी छाती से निकाल कर मेरे चेहरे को पकड़ने लगीं और मेरे होंठों को चूसने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लगा, पर थोड़ा दर्द भी हुआ. पता नहीं ऐसा क्यों हुआ था.

कुछ देर बाद दीदी बोलीं- शिव, तुम मेरे ऊपर आ जाओ और बस धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करते रहना.
मैंने दीदी की कमर पकड़ कर उन्हें पलटा दिया. वो मेरे नीचे आ गईं. मैंने अपनी कमर उठा कर धीरे धीरे धक्का मारना शुरू कर दिया.

तभी दीदी बोलीं- रुको.

मैं रुक गया और दीदी ने मुझसे बोला- पहले मेरे होंठों को चूसो और फिर धीरे धीरे अन्दर बाहर करो.

मैंने दीदी के होंठ चूसे और धीरे धीरे लंड चुत में अन्दर बाहर करने लगा. दीदी मेरी कमर पर हाथ लपेट रही थीं. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

अचानक दीदी ने नीचे से जोर से धक्का दिया … और कुछ बोला, पर उनके होंठों से आवाज बाहर नहीं निकल सकी. कोमल दीदी के बाद मैंने भी उन्हें देखकर बहुत जोर जोर से धक्के दिए.
कुछ देर बाद कोमल दीदी ने पानी छोड़ दिया और मुझे जोर से पकड़ लिया. मैं रुक गया.

दीदी ने कहा- आह शिव … मैं झड़ गई … तुम्हें और करना है?
तो मैंने हां बोला, तो दीदी ने कहा- चलो शुरू हो जाओ.

मैंने लंड से धक्का देना शुरू कर दिया.

दीदी के मुँह से ‘आह आह …’ की आवाज़ आने लगी. कोई पांच मिनट बाद हम दोनों झड़ गए. मैं कोमल दीदी के ऊपर गिर गया.

मैंने दो बार कोमल दीदी की चुदाई की और दोनों बार उनकी चूत में वीर्य डाल कर थक गया था. दीदी भी एकदम बेदम होकर गिर गई थीं.

कुछ देर बाद दीदी को होश आया, तो दीदी ने कहा- शिव.. बहुत थकान हो गई है, चल कुछ खा लेते हैं.. फिर और मस्ती करेंगे.
मैंने दीदी की हां में हां मिला दी.

दीदी ने खाना बनाया और हम दोनों ने खाया. फिर हम दोनों बेड पर लेट गए. मुझे नींद आ गई. शायद कोमल दीदी भी सो गईं.

कुछ देर बाद मैं सो कर उठा, तो देखा कि दीदी मुझसे पहले उठ गई थीं. वो नहाकर आ गई थीं.

मैंने पूछा- दीदी क्या टाइम हुआ है?
दीदी बोलीं- ट्यूशन पढ़ने का टाइम हो गया है.. तुम जल्दी से नहा लो और अपने कपड़े पहन लो. सब बच्चे कुछ देर बाद आ जाएंगे.
मैंने वैसा ही किया.

अब मैं बाहर निकल आया. दीदी सबको पढ़ाने लगी थीं.
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